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IPhO 2026: भारत ने रचा इतिहास, सभी पाँच छात्रों ने जीते स्वर्ण पदक

बुकारामांगा (कोलंबिया): भारत ने 56वें अंतर्राष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (International Physics Olympiad–IPhO 2026) में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। भारतीय दल के सभी पाँच छात्रों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इस उपलब्धि के साथ भारत ने चीन, कज़ाख़स्तान, रूस, दक्षिण कोरिया और ताइवान के साथ संयुक्त रूप से विश्व में पहला स्थान प्राप्त किया।

इस वर्ष आयोजित प्रतियोगिता में 87 देशों के 381 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के बीच भारत के सभी प्रतिभागियों का स्वर्ण पदक जीतना देश की वैज्ञानिक प्रतिभा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और वर्षों की व्यवस्थित तैयारी का प्रमाण है।

अंतर्राष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (IPhO) विश्व की सबसे प्रतिष्ठित स्कूली भौतिकी प्रतियोगिताओं में से एक है। इसकी शुरुआत 1967 में हुई थी और तब से इसका आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है। इसकी मेज़बानी हर वर्ष एक अलग देश करता है। वर्ष 2026 में इसका आयोजन बुकारामांगा, कोलंबिया में हुआ।

स्वर्ण पदक विजेता भारतीय छात्र

  • कनिष्क जैन — पुणे, महाराष्ट्र
  • रिद्धेश अनंत बेंडाले — इंदौर, मध्य प्रदेश
  • ऋषित गर्ग — द्वारका, नई दिल्ली
  • श्रेष्ठ सुरैया — मुंबई, महाराष्ट्र
  • स्वरित जोशी — अहमदाबाद, गुजरात
Indian team wins five gold medals at the 56th International Physics Olympiad 2026 in Bucaramanga, Colombia.

भारत ने अंतर्राष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड में अपनी गौरवशाली परंपरा को बरकरार रखा है। पिछले एक दशक में इस प्रतियोगिता में भारत का कोई भी प्रतिभागी खाली हाथ नहीं लौटा; सभी ने स्वर्ण या रजत पदक जीतकर देश की प्रतिष्ठा बढ़ाई है। यह निरंतर सफलता भारत की मजबूत ओलंपियाड प्रशिक्षण प्रणाली और युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं की उत्कृष्ट तैयारी का प्रमाण है।

भारत की इस सफलता के पीछे होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन (HBCSE) की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह संस्थान टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) का एक राष्ट्रीय केंद्र है और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), भारत सरकार के अधीन कार्य करता है। HBCSE ही देशभर से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें राष्ट्रीय ओलंपियाड कार्यक्रम के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है।

परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने सभी पदक विजेताओं, उनके अभिभावकों, शिक्षकों और प्रशिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत के युवाओं की प्रतिभा, कड़ी मेहनत और वैज्ञानिक सोच का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सफलता देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

भारतीय दल का नेतृत्व प्रो. अन्वेश मजूमदार और डॉ. लीना जोशी ने किया, जबकि प्रो. आनंद दासगुप्ता और सुश्री निशा केलकर ने वैज्ञानिक पर्यवेक्षक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। HBCSE के प्रशिक्षकों और मेंटरों के समर्पित मार्गदर्शन ने भी इस उपलब्धि में अहम योगदान दिया।

भारत की यह सफलता केवल पाँच स्वर्ण पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि भारतीय छात्र वैश्विक स्तर पर विज्ञान के क्षेत्र में लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। यह उपलब्धि देश में वैज्ञानिक शिक्षा, नवाचार और भविष्य के वैज्ञानिक नेतृत्व को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है.


स्रोत एवं फोटो: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), भारत सरकार।


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