मनुष्य जब इस संसार में जन्म लेता है, तब वह बहुत कुछ बिना माँगे ही प्राप्त कर लेता है। जीवन, परिवार, माता-पिता, रिश्ते, संस्कार और अनगिनत उपहार उसे प्रकृति की ओर से सहज ही मिल जाते हैं। यह भी संभव है कि किसी को जन्म से धन-संपदा न मिले, किसी को पर्याप्त सुविधाएँ न मिलें, और किसी के जीवन में कुछ रिश्तों का अभाव भी हो। फिर भी प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ कुछ न कुछ अनमोल लेकर इस संसार में आता है। किंतु जीवन में कुछ ऐसे रिक्त स्थान और कुछ ऐसी भावनात्मक आवश्यकताएँ भी होती हैं, जिन्हें कोई जन्मजात संबंध पूर्ण नहीं कर पाता।
यहीं से आरम्भ होती है उस रिश्ते की कहानी, जिसे हम स्वयं चुनते हैं—मित्रता। जीवन में यदि किसी संबंध को चुनने की स्वतंत्रता हमें मिली है, तो वह है मित्र, सखा और दोस्त चुनने की। सच्चा मित्र केवल साथ चलने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह हमारे व्यक्तित्व को ऊँचाइयों तक ले जाने वाला, कठिन समय में संबल बनने वाला और सुख-दुःख का सच्चा सहभागी होता है। उसकी एक पुकार पर सब कुछ छोड़कर उसके पास पहुँच जाने की सहज इच्छा ही मित्रता की सबसे बड़ी पहचान है। यही वह रिश्ता है जो कई बार रक्त संबंधों से भी ऊपर उठ जाता है। यदि यह रिश्ता निभाया जाता है, तो वह श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी अमर मित्रता का उदाहरण बन जाता है—निस्वार्थ, अटूट, समर्पित और जीवनभर साथ निभाने वाला।
आइए, मित्रता के इस पवित्र और अनुपम बंधन को भारतीय मनीषियों, संतों, महापुरुषों और विश्व के महान विचारकों की दृष्टि से समझने का प्रयास करें। जानते हैं कि उन्होंने मित्रता के बारे में क्या कहा, क्या लिखा और क्यों इसे मानव जीवन की सबसे अनमोल धरोहर माना।
संत तुलसीदास (रामचरितमानस से)
"जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हें बिलोकत पातक भारी॥"अर्थात- जो मित्र के दुःख से दुःखी नहीं होता, उसे देखने मात्र से पाप लगता है। सच्चा मित्र आपके संकट में आपकी ढाल बनता है।
स्वामी विवेकानंद
"सच्ची मित्रता के लिए दो पक्षों के बीच समानता होनी जरूरी है। जहाँ एक पक्ष याचक (भीख मांगने वाला) हो और दूसरा दाता, वहाँ व्यापार हो सकता है, लेकिन सच्ची मित्रता नहीं हो सकती।"
आचार्य चाणक्य
"आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रुसंकटे। राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बान्धवः॥"अर्थात- जो बीमारी में, संकट में, अकाल के समय, दुश्मनों के हमले के दौरान, राजदरबार (कोर्ट-कचहरी) में और श्मशान में साथ खड़ा रहे, वही वास्तविक भाई और सच्चा मित्र है।
महात्मा गांधी
"अपने मित्रों के प्रति मित्रवत होना बहुत आसान है। लेकिन जो खुद को आपका दुश्मन मानता है, उसे अपना मित्र बनाना ही सच्चे धर्म का सार है।"
रवींद्रनाथ टैगोर
"सच्ची मित्रता उस प्रकाश की तरह है जो जीवन के सबसे घने अंधेरे में भी रास्ता दिखाती है। यह आपके अंतर्मन को समृद्ध करती है।"
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य (संस्थापक गायत्री परिवार)
"अगर आप कोई दोष रहित मित्र चाहते हैं, तो आप मित्र रहित रह जाएंगे।"(सीख: इंसान गलतियों का पुतला है, दोस्त की कमियों को स्वीकार करना ही सच्ची दोस्ती है।)
कबीरदास
"कबीर धीरज के धरे, हाथी मन डोलंत। सिंह को संग न कीजिए, मतलबी मित्र बहुतंत॥"अर्थात- मतलबी और स्वार्थी मित्रों की भीड़ से अकेले रहना कहीं बेहतर है। सच्चा मित्र वही है जो ढाल की तरह हर वार अपने ऊपर ले ले।
महर्षि वेदव्यास (महाभारत - शांतिपर्व से)
"न कश्चित् कस्यचिन्मित्रं न कश्चित् कस्यचित् रिपुः। व्यवहारेण जायन्ते मित्राणि रिपवस्तथा॥"अर्थात- जन्म से न तो कोई किसी का मित्र होता है और न ही शत्रु। हमारे व्यवहार, वाणी और कर्मों से ही लोग हमारे मित्र या शत्रु बनते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण (श्रीमद्भगवद्गीता के सार से)
"जो व्यक्ति बिना किसी ईर्ष्या के, सभी जीवों के प्रति दयालु है, जिसमें स्वामित्व (ममता) की भावना नहीं है, जो अहंकार से मुक्त है और सुख-दुख में समान रहता है, वही सबसे उत्तम और वफादार मित्र बनने योग्य है।"
महाकवि भर्तृहरि (नीतिशतकम् से)
"पापान्निवारयति योजयते हिताय, गुह्यं निगूहति गुणान् प्रकटीकरोति।"अर्थात- सच्चा मित्र वह है जो आपको गलत रास्ते पर जाने (पाप करने) से रोके, आपके हित के काम में लगाए, आपकी गुप्त बातों को छुपाए और समाज के सामने केवल आपके गुणों को प्रकट करे।
संत रहीम (रहीम दास)
"कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, तेई सांचे मीत॥"अर्थात- जब हमारे पास धन-दौलत होती है, तो बहुत से लोग कई तरीकों से हमारे मित्र बन जाते हैं। लेकिन जो मुसीबत के समय काम आता है, असल में वही सच्चा मित्र होता है।
ओशो (आचार्य रजनीश)
"दोस्ती प्रेम का सबसे शुद्धतम रूप है। इसमें कोई शर्त नहीं होती, कोई मांग नहीं होती। यह बस दो आत्माओं का एक-दूसरे की उपस्थिति में आनंदित होना है।"
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
"एक अच्छी किताब सौ अच्छे दोस्तों के बराबर होती है, लेकिन एक अच्छा दोस्त पूरी लाइब्रेरी (पुस्तकालय) के बराबर होता है।"
मुंशी प्रेमचंद
"मित्रता कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो केवल ऊंचे महलों में पनपे। यह दिल का मेल है, जहाँ अमीरी और गरीबी की दीवारें मायने नहीं रखतीं।"
स्वामी रामतीर्थ
"यदि आप दुनिया को अपना मित्र बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने भीतर की आत्मा से मित्रता कीजिए। जो स्वयं से प्रेम करना सीख जाता है, पूरी सृष्टि उसकी मित्र हो जाती है।"
पाश्चात्य और वैश्विक दार्शनिकों के विचार
अरस्तू (Aristotle):
मित्रता दो शरीरों में रहने वाली एक ही आत्मा है।
सुकरात (Socrates):
दोस्ती करने में धीमी गति अपनाएं, लेकिन जब कर लें, तो उस पर दृढ़ और स्थिर रहें।
एल्बर्ट हब्बार्ड (Elbert Hubbard):
एक सच्चा दोस्त वह है जो आपके बारे में सब कुछ जानता है और फिर भी आपसे प्यार करता है।
मार्क ट्वेन (Mark Twain):
अच्छे दोस्त, अच्छी किताबें और एक सोया हुआ विवेक; यही आदर्श जीवन है।
हेलेन केलर (Helen Keller):
उजाले में अकेले चलने से बेहतर है कि अंधेरे में किसी दोस्त के साथ चला जाए।
राल्फ वाल्डो इमर्सन (Ralph Waldo Emerson):
मित्र पाने का एकमात्र तरीका खुद एक सच्चा मित्र बनना है।
मार्टिन लूथर किंग जूनियर:
अंत में, हम अपने दुश्मनों के शब्द नहीं, बल्कि अपने दोस्तों की खामोशी याद रखेंगे।
वॉल्टर विंचेली (Walter Winchell):
एक वास्तविक मित्र वह है जो तब आपके पास आता है जब पूरी दुनिया आपको छोड़कर चली जाती है।
सिसरो (Cicero):
जीवन से मित्रता को हटा देना वैसा ही है जैसे दुनिया से सूर्य को हटा देना।
एपिड्यूरस (Epicurus):
जीवन भर खुश रहने के लिए बुद्धिमत्ता द्वारा प्रदान की गई सभी चीज़ों में से, मित्रता सबसे महान है।
कन्फ्यूशियस (Confucius):
कभी भी ऐसे व्यक्ति से मित्रता न करें जो आपसे (गुणों में) कमतर हो।
चार्ल्स डार्विन (Charles Darwin):
किसी व्यक्ति की दोस्ती उसके मूल्य का सबसे अच्छा पैमाना है।
हशेल (Hesiod):
एक वफादार दोस्त जीवन की दवा है।
महान विचारकों के इन विचारों को पढ़ने के बाद सहज ही अनुभव होता है कि सच्ची मित्रता केवल एक संबंध नहीं, बल्कि जीवन की सबसे अनमोल उपलब्धि है। मित्रता केवल एक संबंध नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है। सच्चा मित्र वह नहीं जो केवल हमारे सुख का साथी बने, बल्कि वह है जो कठिनाइयों में हमारा हाथ थामे, हमारी कमियों को स्वीकार करे, हमें सही मार्ग दिखाए और बिना किसी स्वार्थ के हर परिस्थिति में साथ खड़ा रहे। समय, दूरी और परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, पर सच्ची मित्रता कभी नहीं बदलती। जीवन में धन, पद और प्रतिष्ठा का महत्व अपनी जगह है, किंतु एक सच्चे मित्र का साथ इन सबसे कहीं अधिक मूल्यवान होता है। इसलिए मित्रता का सम्मान करें, उसे विश्वास, प्रेम, त्याग और समर्पण से सींचें, क्योंकि जीवन की सबसे सुंदर यात्राएँ अक्सर सच्चे मित्रों के साथ ही पूरी होती हैं।
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