मैं भारत का विद्यार्थी हूँ
आदरणीय मुख्य अतिथिगण, प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावकजन और मेरे प्यारे दोस्तों,
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज मैं किसी महान नेता का भाषण दोहराने नहीं आया हूँ।
आज मैं सिर्फ एक विद्यार्थी के रूप में अपने मन की बात कहना चाहता हूँ।
मैं भारत का विद्यार्थी हूँ।
मेरे हाथ में आज किताब है। मेरे सामने स्कूल की कक्षा है। मेरे पास पढ़ने का अवसर है। मैं अपने सपनों के बारे में सोच सकता हूँ। मैं अपने भविष्य का फैसला कर सकता हूँ।
लेकिन क्या मैंने कभी सोचा है कि यह सब कितना बड़ा सौभाग्य है?
एक समय था जब हमारा देश स्वतंत्र नहीं था।
लोगों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता था। हमारे स्वतंत्रता सेनानी जेल जाते थे। उन पर अत्याचार होते थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए लड़ाई लड़ी।
और वह आने वाली पीढ़ी आज हम हैं।
इसलिए जब मैं तिरंगे को देखता हूँ, तो मुझे केवल तीन रंग दिखाई नहीं देते।
मुझे त्याग दिखाई देता है।
मुझे संघर्ष दिखाई देता है।
मुझे उम्मीद दिखाई देती है।
केसरिया मुझे साहस की याद दिलाता है।
सफेद मुझे शांति और सच्चाई की याद दिलाता है।
हरा मुझे विकास और समृद्धि की याद दिलाता है।
और बीच में अशोक चक्र मुझे यह याद दिलाता है कि हमें लगातार आगे बढ़ते रहना है।
लेकिन सवाल यह है कि मैं, एक विद्यार्थी, अपने देश के लिए क्या कर सकता हूँ?
मैं सोचता था कि देश की सेवा करने के लिए मुझे बड़ा अधिकारी बनना होगा। फिर मैंने समझा कि ऐसा जरूरी नहीं है।
अगर मैं ईमानदारी से पढ़ता हूँ, तो मैं देश की सेवा कर रहा हूँ।
अगर मैं अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करता हूँ, तो मैं देश की सेवा कर रहा हूँ।
अगर मैं पेड़ बचाता हूँ, पानी बचाता हूँ और अपने आसपास सफाई रखता हूँ, तो मैं देश की सेवा कर रहा हूँ।
अगर मैं किसी कमजोर बच्चे का मजाक उड़ाने के बजाय उसकी मदद करता हूँ, तो मैं देश की सेवा कर रहा हूँ।
और अगर मैं बड़ा होकर अपने काम को ईमानदारी से करता हूँ, तो मैं निश्चित रूप से देश की सेवा करूँगा।
साथियों,
भारत का भविष्य केवल संसद में नहीं लिखा जाएगा।
भारत का भविष्य हमारे स्कूलों में लिखा जा रहा है।
हमारी कक्षाओं में।
हमारी किताबों में।
हमारे व्यवहार में।
और हमारे सपनों में।
इसलिए आज मैं खुद से एक वादा करना चाहता हूँ—
मैं अपने देश से केवल यह नहीं पूछूँगा कि देश ने मुझे क्या दिया।
मैं यह पूछूँगा—
मैं अपने देश को क्या दे सकता हूँ?
शायद मेरा योगदान छोटा हो।
लेकिन करोड़ों छोटे-छोटे योगदान मिलकर एक महान भारत बनाते हैं।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम अपने भीतर के अच्छे नागरिक को जगाएँ।
क्योंकि हम केवल भारत का भविष्य नहीं हैं।
हम भारत का वर्तमान भी हैं।
जय हिंद!