स्वतंत्रता का अर्थ क्या है?
आदरणीय मुख्य अतिथिगण, प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावकजन और मेरे प्यारे साथियों—आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज हम सब यहाँ भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। हमारे हाथों में तिरंगा है, चारों ओर देशभक्ति के गीत सुनाई दे रहे हैं और हमारे मन में भारत के लिए गर्व की भावना है।
लेकिन आज मैं आप सभी से एक छोटा-सा सवाल पूछना चाहता हूँ—
आखिर स्वतंत्रता का अर्थ क्या है?
क्या स्वतंत्रता का अर्थ केवल इतना है कि हम 15 अगस्त को ध्वजारोहण करें, राष्ट्रगान गाएँ और फिर अपने घर चले जाएँ?
नहीं।
स्वतंत्रता का अर्थ इससे कहीं बड़ा है।
15 अगस्त 1947 को हमारे देश ने विदेशी शासन से आजादी प्राप्त की। लेकिन इस आजादी के पीछे केवल एक तारीख नहीं थी। इसके पीछे वर्षों का संघर्ष था। इसके पीछे जेलों की यातनाएँ थीं। इसके पीछे लाठियाँ थीं, गोलियाँ थीं, त्याग था और ऐसे हजारों-लाखों लोगों के सपने थे, जिनके नाम शायद इतिहास की किताबों में भी नहीं लिखे गए।
महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर लोगों को एकजुट किया। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने अपने जीवन का बलिदान दिया। सुभाष चंद्र बोस ने देशवासियों में स्वतंत्रता का जोश जगाया। रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें यह सिखाया कि देश से बड़ा कुछ नहीं होता।
लेकिन साथियों, आज हमारी परीक्षा अलग है।
आज हमें किसी विदेशी शासन से लड़ना नहीं है। आज हमें अपने भीतर की कमजोरियों से लड़ना है।
हमें आलस्य से लड़ना है।
हमें झूठ से लड़ना है।
हमें भ्रष्टाचार से लड़ना है।
हमें भेदभाव से लड़ना है।
हमें उस सोच से लड़ना है जो कहती है—“मेरे अकेले से क्या फर्क पड़ेगा?”
फर्क पड़ता है।
एक विद्यार्थी ईमानदारी से पढ़ता है—फर्क पड़ता है।
एक बच्चा सड़क पर कूड़ा नहीं फेंकता—फर्क पड़ता है।
कोई व्यक्ति किसी जरूरतमंद की मदद करता है—फर्क पड़ता है।
हम अपने देश के कानून, प्रकृति, सार्वजनिक संपत्ति और एक-दूसरे का सम्मान करते हैं—फर्क पड़ता है।
क्योंकि देश केवल सरकार से नहीं बनता।
देश हमसे बनता है।
आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, तो आइए हम केवल यह न कहें कि हमें अपने देश पर गर्व है। आइए हम ऐसा काम करने का संकल्प लें जिससे हमारा देश हम पर गर्व कर सके।
मैं अपने सभी साथियों से कहना चाहता हूँ—
हम आज के विद्यार्थी हैं, लेकिन कल के भारत के नागरिक और निर्माता हैं।
हमारी किताबें, हमारी मेहनत, हमारी ईमानदारी और हमारे सपने—यही आने वाले भारत की नींव हैं।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम एक छोटा-सा संकल्प लें—
हम अच्छे विद्यार्थी बनेंगे, अच्छे इंसान बनेंगे और सबसे बढ़कर अच्छे भारतीय बनेंगे।
जय हिंद!
जय भारत!