उन लोगों के नाम जिन्हें इतिहास भूल गया
आदरणीय मुख्य अतिथिगण, प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण, उपस्थित अभिभावकजन और मेरे प्यारे साथियों,
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
जब हम भारत की आजादी की बात करते हैं, तो हमारे सामने कुछ महान नाम तुरंत आ जाते हैं। महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू, रानी लक्ष्मीबाई और ऐसे अनेक महान स्वतंत्रता सेनानी।
लेकिन आज मैं उन लोगों के बारे में बात करना चाहता हूँ, जिनके नाम शायद हम नहीं जानते।
वह माँ, जिसने अपने बेटे को देश के लिए विदा किया होगा।
वह पिता, जिसने अपने बच्चे को जेल जाते हुए देखा होगा।
वह किसान, जिसने अपनी मेहनत की कमाई आंदोलन में लगा दी होगी।
वह विद्यार्थी, जिसने अपनी पढ़ाई छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया होगा।
वह महिला, जिसने घर की जिम्मेदारियाँ संभालते हुए आंदोलनकारियों की मदद की होगी।
और वह साधारण नागरिक, जिसने शायद कभी अखबार में अपना नाम नहीं देखा, लेकिन देश की आजादी के लिए अपना योगदान दिया।
आजादी किसी एक व्यक्ति की देन नहीं थी।
यह करोड़ों भारतीयों की सामूहिक इच्छा और संघर्ष का परिणाम थी।
कई लोग जेल गए। कई लोगों ने अपना घर छोड़ा। कई लोगों ने अपना रोजगार खोया। कई लोगों ने अपने परिवारों से दूर रहकर संघर्ष किया। और कई लोग ऐसे भी थे जिन्होंने अपना जीवन देश के नाम कर दिया।
हम अक्सर इतिहास में बड़े नाम पढ़ते हैं। लेकिन इतिहास की असली ताकत उन अनगिनत सामान्य लोगों में भी छिपी है जिन्होंने असाधारण साहस दिखाया।
साथियों,
आज हम एक स्वतंत्र देश में पैदा हुए हैं। हमने गुलामी देखी नहीं है। हमने अंग्रेजी शासन का अत्याचार महसूस नहीं किया। हमारे लिए आजादी स्वाभाविक लगती है।
लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि जो चीज हमें आज सहज लगती है, उसे पाने के लिए किसी और पीढ़ी ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई थी।
इसलिए स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं है।
यह कृतज्ञता का दिन भी है।
उन लोगों के प्रति कृतज्ञता, जिन्होंने हमारे लिए रास्ता बनाया।
और यह जिम्मेदारी का दिन भी है।
क्योंकि जिन लोगों ने आजादी के लिए संघर्ष किया, उन्होंने केवल आज का भारत नहीं देखा था। उन्होंने आने वाले भारत का सपना देखा था।
एक ऐसा भारत जहाँ हर बच्चा पढ़ सके।
जहाँ हर व्यक्ति सम्मान के साथ जी सके।
जहाँ गरीब और कमजोर व्यक्ति भी न्याय पा सके।
जहाँ अलग-अलग भाषाएँ, धर्म और संस्कृतियाँ मिलकर एक देश बनें।
अब उस सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी हमारी है।
हम शायद आजादी के लिए लड़ाई नहीं लड़ सकते, लेकिन हम अपने देश को बेहतर बनाने की लड़ाई जरूर लड़ सकते हैं।
हम मेहनत कर सकते हैं।
ईमानदार रह सकते हैं।
दूसरों का सम्मान कर सकते हैं।
और अपने देश के प्रति जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं।
आज तिरंगे को देखते हुए मैं उन सभी ज्ञात और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करता हूँ।
हम उन्हें याद रखें या न रखें, लेकिन उनकी कुर्बानियाँ हमारे जीवन में हमेशा जीवित रहेंगी।
जय हिंद!
वंदे मातरम्!